भारत-मालदीव में ऐसा क्या समझौता हुआ, जिससे परेशान हो गया चीन

भारत और मालदीव के बीच बेहतर होते संबंधों का ट्रेलर दिखना शुरू हो गया. मालदीव ने 28 द्वीपों की व्यवस्था को भारत को सौंपने का फैसला लिया है. इन 28 द्वीपों पर अब पानी सप्लाई और सीवर से जुड़ी परियोजनाओं पर काम करने और इसकी देखरेख करने की जिम्मेदारी भारत सरकार की होगी. मालदीव के राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज़्ज़ू ने खुद इसका ऐलान किया है.
पीएम मोदी की लक्षद्वीप यात्रा और मालदीव और भारत के संबंधों में आए तनाव के बाद दोनों देशों में हुआ ये नया समझौता भारत विरोधियों को चुभ सकता है, लेकिन ऐसे वक्त में जब बांग्लादेश में भारत समर्थित सरकार का तख्तापलट हुआ है, ये भारत की कूटनीति के लिहाज से अच्छी खबर है. दरअसल मालदीव में लगभग 1190 द्वीप हैं जिनमें से 200 द्वीपों पर ही आबादी है.. 150 द्वीप ऐसे हैं जिन्हें पर्यटन के लिए विकसित किया गया है. अब स्थिति ये होने वाली है कि 200 में से 28 द्वीपों की व्यवस्था भारत के हाथ में आ जाएगी.
दोनों देशों में क्या हुआ समझौता?
भारत और मालदीव के बीच हुए समझौते के तहत मालदीव के 28 द्वीपों में पानी की सप्लाई और सीवर सफाई का काम भारत देखेगा. इस काम के लिए भारत ने मालदीव में 920 करोड़ रुपये का निवेश किया था. इससे मालदीव के 28 हजार लोगों को सीधा फायदा होगा. इस समझौते का ऐेलान करते हुए मालदीव के राष्ट्रपति ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट किया, जिसमें उन्होंने लिखा कि मालदीव के 28 द्वीपों में पानी और नाले से जुड़ी परियोजनाओं को आधिकारिक तौर पर सौंपे जाने के मौक़े पर डॉक्टर एस जयशंकर से मिलकर ख़ुशी हुई. हमेशा मालदीव की मदद करने के लिए मैं भारत सरकार और ख़ासतौर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का धन्यवाद करता हूं.
भारत को क्यों सौंपी व्यवस्था?
लोगों के मन में ये सवाल हो सकता है कि सिर्फ पानी और सीवर की साफ-सफाई के लिए मुइज्जू ने 28 द्वीपों की व्यवस्था भारत को क्यों सौंप दी. दरअसल मालदीव में होटलों और रिसॉर्ट्स के लिए कूड़ा फेंकने के सख्त नियम हैं. यहां होटलों और रिसॉर्ट्स के लिए कचरे को अलग-अलग करना अनिवार्य है. ठोस कचरे को थिलाफुशी द्वीप पर भेजा जाता है, यहां उसे गलाया जाता है. होटलों और रिसॉर्ट्स को ये सुनिश्चित करना होता है कि उनका कचरा सही तरीके से पैक और लेबल किया गया हो, ताकि वो सुरक्षित रूप से थिलाफुशी पहुँचाया जा सके.
मालदीव में कूड़ा फेंकने के लिए मुख्य स्थान थिलाफुशी द्वीप है, जिसे अक्सर ‘गारबेज आइलैंड’ के नाम से जाना जाता है. ये द्वीप माले से करीब 7 किलोमीटर दूर है. 1990 के दशक में कचरा फेंकने के लिए इसे एक लैंडफिल के रूप में विकसित किया गया था. इसके बाद से मालदीव के दूसरे द्वीपों से कचरा इकट्ठा करके थिलाफुशी में फेंका जाता है. कूड़े के निस्तारण के लिए भारत मालदीव को टेक्नोलॉजी और वित्तीय मदद देता है.
पहले मोइज्जू देते थे इंडिया आउट का नारा
दरअसल मालदीव के राष्ट्रपति मोहम्मद मोइज्जु इंडिया आउट का नारा देकर सत्ता में आए थे. पिछले वर्ष 17 नवंबर को सत्ता हासिल करने के बाद उन्होंने मालदीव में मौजूद भारतीय सैनिकों को वापस भेजने में काफी तेजी दिखाई थी. राष्ट्रपति बनने के बाद उनकी पहली विदेश यात्रा टर्की और दूसरी यात्रा चीन की थी, सामान्य तौर पर मालदीव के राष्ट्रपति की पहली विदेश यात्रा भारत की होती है. पीएम मोदी की लक्षद्वीप यात्रा पर मालदीव के कई मंत्रियों ने विवादित बयान दिए थे, हालांकि डैमेज कंट्रोल करते हुए मोइज्जू ने उन्हें पद से हटा दिया था.
अब ले लिया यू टर्न
मालदीव में लगातार हो रहे ऐसे फैसलों से ये माना जा रहा था कि चीन समर्थक मोइज्जू.. चीन के दबाव में भारत से अच्छे रिश्ते नहीं रखेंगे, लेकिन मालदीव को विपक्षी दलों के दबाव और अपनी जरूरतों को देखते हुए.. यू-टर्न लेना पड़ा. भारत से रिश्ते सुधारने के लिए मोइज्जू प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के शपथ ग्रहण समारोह में शामिल हुए. माना जा रहा है कि यहीं से दोनों देशों के रिश्ते बेहतर होने की शुरुआत हुई. जून में राष्ट्रपति मोइज्जू ने भारत की यात्रा की थी और अब जाकर विदेश मंत्री एस जयशंकर ने मालदीव की यात्रा की, जिसमें मालदीव ने 28 द्वीपों को भारत को सौंपने का एलान किया.
एसजयशंकर की यात्रा पर चीन की नजर
विदेश मंत्री एस जयशंकर की तीन दिनों की मालदीव यात्रा पर चीन की पैनी नजर थी. “चीनी विशेषज्ञों ने रविवार को कहा है कि चीन मालदीव के साथ बहुत ख़ास संबंध या सहयोग की इच्छा नहीं रखता है, जबकि भारत इस इलाक़े में अपने प्रभुत्व के लिए चीन को एक डर के तौर पर पेश करता है.” वैसे चीन के सरकारी अखबार का एस जयशंकर की यात्रा पर नजर रखना ये प्रदर्शित करता है, चीन छटपटा तो रहा है लेकिन वो भारत और मालदीव के रिश्ते खराब करने में नाकाम रहा. एस जयशंकर की इसी यात्रा में एक और बड़ा समझौता हुआ है. इन्हीं में एक समझौता यूनिफाइड पेमेंट इंटरफेस यानी UPI से जुड़ा है. आने वाले दिनों में मालदीव में पहला यूपीआई ट्रांजेक्शन देखने के लिए मिलेगा.
– Tv9 ब्यूरो

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