कविता कृष्णमूर्ति को इस गाने के लिए पड़ी थी ऐसी डांट कि आंख से रुक नहीं रहे थे आंसू?

कविता कृष्णमूर्ति का आज जन्मदिन है. 1980-90 के दशक में उन्होंने फिल्म इंडस्ट्री को एक से बढ़कर एक हिट गाने दिए. कविता कृष्णमूर्ति की गायकी में कमाल की विविधिता थी. उन्होंने एक ऐसा गाना भी गाया था जो कमाल का हिट तो हुआ लेकिन उसके लिए मन्ना डे ने उन्हें जमकर खरी खोटी सुनाई थी. पढ़िए ये दिलचस्प कहानी.

Kavita Krishnamurthi Birthday: 1994 का साल था. निर्देशक राजीव राय फिल्म बना रहे थे- मोहरा. फिल्म में अक्षय कुमार, सुनील शेट्टी, रवीना टंडन, नसीरूद्दीन शाह, परेश रावल जैसे दिग्गज कलाकार थे. विजू शाह का संगीत था. इसी फिल्म में एक गाना था- तू चीज बड़ी है मस्त-मस्त. इस गाने को आनंद बक्षी ने लिखा था और आवाज कविता कृष्णमूर्ति ने दी थी. ये गाना कमाल का हिट हुआ. उस दौर में फिल्म म्यूजिक के जितने भी काउंटडाउन वाले कार्यक्रम थे उसमें ये गाना नंबर-वन पर चल रहा था. कविता कृष्णमूर्ति इस कामयाबी से बहुत खुश थीं. इसी खुशी को बांटने के लिए वो मन्ना डे के पास गईं. कविता कृष्णमूर्ति के लिए मन्ना डे पिता की तरह थे. मन्ना डे और हेमंत कुमार ने कविता कृष्णमूर्ति की शुरूआती दिनों में बहुत मदद की थी. कविता इन दोनों दिग्गज कलाकारों के लाइव कार्यक्रमों में खूब गाती थीं.

1974 में कविता कृष्णमूर्ति के पिता के निधन के बाद मन्ना डे और हेमंत कुमार ने उन्हें बिल्कुल अपनी बेटी की तरह पाला. तो हुआ यूं कि कविता कृष्णमूर्ति ने मन्ना डे को बताया कि उनका गाया गाना चार्टबस्टर में नंबर वन चल रहा है. मन्ना डे ने पूछा- कौन सा गाना. कविता कृष्णमूर्ति ने कहा- तू चीज बड़ी है मस्त मस्त. इतना सुनते ही मन्ना दा भड़क गए. मन्ना दा अपने गानों में लिरिक्स को लेकर बहुत सतर्क रहते थे. उन्हें इस बात पर गुस्सा आया कि कविता ने ऐसी हल्की ‘लिरिक्स’ वाले गाने के लिए ‘हां’ क्यों की. मन्ना दा गुस्से में बोलते रहे, उधर कविता कृष्णमूर्ति के आंसू बहने शुरू हुए. मन्ना डे ने गुस्से में यहां तक कह दिया कि तुमने ये गाना गाकर महिलाओं का अपमान किया है. एक महिला होकर भी ऐसा गाना गाने से पहले तुमने सोचा क्यों नहीं? कविता कृष्णमूर्ति के मुंह से एक शब्द भी नहीं निकला. वो लगातार रोती रहीं. बाद में वो चुपचाप बगैर कुछ कहे वहां से चली गईं. आपको जानकर हैरानी होगी कि भले ही इस गाने के बोल हल्के थे लेकिन इस गाने की शुरूआत शुद्ध शास्त्रीय राग भीमपलासी पर आधारित थी.

इससे पहले भी एक बार कविता को पड़ी थी जबरदस्त डांट

कविता कृष्णमूर्ति को इतनी कड़क डांट शायद एक बार और पड़ी थी. उसका किस्सा भी बहुत दिलचस्प है. वो विजयादशमी का दिन था. कविता कृष्णमूर्ति के बचपन की बात है. दुर्गा जी की प्रतिमा का विसर्जन होना था. कविता कृष्णमूर्ति का नाम तब शारदा हुआ करता था. शारदा को सख्त हिदायत थी कि उन्हें काली बाड़ी से यमुना विसर्जन में नहीं जाना है. कविता कृष्णमूर्ति का बचपन दिल्ली में ही बीता है. खैर, आस-पड़ोस के तमाम बच्चे मूर्ति विसर्जन में जा रहे थे. शारदा और उनके भाई भी घरवालों को बिना बताए ट्रक में चढ़ गए. यमुना में दिल्ली के कोने-कोने से मूर्ति विसर्जन के लिए लोग आए थे. खूब भीड़ थी. विसर्जन होते-होते देर हो गई. इधर घर पर कोहराम मच गया. शारदा के घरवालों ने अड़ोस-पड़ोस में सबसे पूछताछ शुरू कर दी. किसी पड़ोसी ने बताया कि उसने दोनों बच्चों को ट्रक में जाते देखा है. तब जाकर शारदा के परिवार वालों को थोड़ी राहत मिली.

चिल्लाई थी कि उसका गला ही बैठ गया था. इस बात पर ज्यादा डांट पड़ी. मां ने कहाकि अब चार दिन तुम गा नहीं पाओगी. गुरु जी सिखाने आएंगे तो उन्हें क्या कहोगी? इस डांट में संगीत को लेकर उनका समर्पण भी दिखता है. इसके अलावा बचपन में एक बार कविता कृष्णमूर्ति ने सबको देख-देखकर सिगरेट का एक कश खींच लिया. इसके बाद उन्हें जो खांसी आई कि उन्होंने कसम ही खा ली कि दोबारा कभी ऐसा नहीं करना.

जब लता जी से पहली बार मिलीं कविता कृष्णमूर्ति

प्लेबैक गायकी में करियर बनाने के लिए कविता मुंबई ‘शिफ्ट’ हो गईं. मुंबई में ही अमीन सयानी ने जब पहली बार कविता कृष्णमूर्ति को सुना तो उनकी मां से पूछा क्या आप इस बच्ची को गाना गवाकर बहुत सारे पैसे कमाना चाहती हैं. सीधा जवाब मिला- ये लड़की अगर अच्छा गाएगी तो पैसा अपने आप आ जाएगा. ये लड़की लता मंगेशकर को अपना भगवान मानती है. इसे ‘परफेक्शन’ चाहिए, पैसा नहीं. ये जवाब सुनने के बाद अमीन सयानी ने कविता कृष्णमूर्ति को जाने-माने संगीतकार सी. रामचंद्र के पास भेजा. सी. रामचंद्र ने कविता को सुनने के बाद कहा कि- बेटा तुम अच्छा गाती हो लेकिन मेरे पास दस साल बाद आना. अभी मुझसे सीखने के लिए तुम बहुत छोटी हो. उस रोज कविता उदास थीं. ये उस समय की बात है जब कविता कृष्णमूर्ति का कॉलेज चल रहा था.

ये वो दौर था जब गायकों को संगीतकारों के साथ लाइव गाना होता था. सब कुछ सेट हो गया था. ऐसा लग रहा था कि हर कोई किसी का इंतजार कर रहा है. थोड़ी देर बाद स्टूडियो का दरवाजा खुला और लता मंगेशकर अंदर आईं. लता जी को सामने देखकर कविता जी घबरा गईं. ये स्वाभाविक भी था. तब हेमंत दा ने कविता को बताया कि वो दो लाइन लता जी के साथ ही गानी है. कविता कृष्णमूर्ति ने माइक के सामने पहला गाना लता जी के साथ गाया है. कविता कृष्णमूर्ति को आज भी ये बात किसी सपने जैसी ही लगती है.

फिर कुछ यूं हुआ कि हेमंत कुमार ने कविता कृष्णमूर्ति को मन्ना दा के पास भेजा. कविता कृष्णमूर्ति का मन्ना दा के साथ स्टेज शो का सिलसिला भी शुरू हो गया. इसके कुछ ही दिन बाद की बात है. हेमंत कुमार ने कविता कृष्णमूर्ति से फोन करके पूछा कि वो अगले दिन क्या कर रही हैं. अगले दिन कविता का कॉलेज था. लेकिन हेमंत कुमार ने कविता को कॉलेज ‘बंक’ करके राजकमल स्टूडियो बुलाया. अगले दिन कविता जब वहां पहुंची तो वहां हेमंत दा पहले से ही थे. उन्होंने कविता को टैगोर गीत सिखाया. यानी थोड़ी रिहर्सलकराई.

 

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