प्रधानमंत्री का चीनी प्रेम भारत के लिए खतरा… विदेश मंत्री के बयान पर बोले कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे

कांग्रेस पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने शनिवार को चीन को लेकर विदेश मंत्री एस जयशंकर के बयान पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने कहा कि विदेश मंत्री संसद में मौन रहते हैं. प्रधानमंत्री का चीनी प्रेम भारत की आर्थिक और भौगोलिक संप्रभुता के लिए और अखंडता के लिए खतरा है. ये बड़ा अजीब बात है कि प्रधानमंत्री और उनके विदेश मंत्री चीन पर संसद में विपक्ष के सवालों पर मौन रहते हैं, लेकिन विदेशी धरती पर बयानबाजी करते रहते हैं.
खरगे ने एक्स पर पोस्ट करते हुए आगे कहा कि अब विदेश मंत्री ने कह रहे हैं कि चीन के साथ 75 फीसदी डिसइंगेजमेंट हो चुका है. ये वही विदेश मंत्री हैं जिन्होंने अप्रैल 2024 में ‘चीन ने हमारी किसी भी जमीन पर कब्जा नहीं किया है’ जैसा बयान मोदी जी की क्लीन चिट को कॉपी करके ही दिया है. इन्होंने गलवान में शहीद हमारे 30 जवानों की प्राणों की आहुति को दरकिनार करके चीन को क्लीन चिट थमाई.
‘कई पेट्रोलिंग पॉइंट अभी भी भारत से वंचित’
कांग्रेस नेता ने पूछा कि क्या ये सच नहीं है कि देपसांग मैदान, डेमचोक नाला, हॉट स्प्रिंग्स और गोगरा पोस्ट में कई पेट्रोलिंग पॉइंट से अभी भारत वंचित है? क्या ये सच नहीं है कि मई 2020 के कई अतिक्रमण बिंदुओं पर भारत की ओर से दावा की गई रेखाओं के अंदर बफर जोन बनाकर इस सरकार ने चीन के पक्ष में एक वास्तविक बदलाव को मंजूर कर दिया है.
उन्होंने कहा कि मेक इन इंडिया और आत्मनिर्भर भारत पर पूरी तरह से नाकाम रही ये सरकार अब डोकलाम और गलवान भूलकर चीनी कंपनियों के लिए लाल कारपेट बिछाने में मशगूल हैं. सरकार ने पहले ही चीनी नागरिकों के लिए वीजा जारी करना आसान कर दिया है और चीनी निवेश के लिए तैयारियां हो रही हैं. गलवान के बाद से चीनी सामान का आयात 56 फीसदी बढ़ गया है. ऐप बैन करना तो दिखावा था, सरकार अब खुलकर चीनी निवेश की पैरवी कर रही है.
कांग्रेस चीफ बोले- चीनी लगाव देश के लिए हानिकारक
उन्होंने कहा कि गुजरात में झूला डिप्लोमेसी से लेकर गलवान त्रासदी तक, पीएम केयर में चीनी फंड से लेकर अब विफल पीएलआई योजना में चीनी जान फूकने तक. ये हैरानी की बात नहीं है कि सरकार की प्रिय सेबी चेयरपर्सन भी चीनी कंपनियों में निवेश करने से पीछे नहीं हैं. नए खुलासों से यही साबित होता है कि बहुत कुछ है जिसकी पर्देदारी है. प्रधानमंत्री का चीनी लगाव देश के लिए हानिकारक है.

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