भारत, नेपाल, श्रीलंका के ही नहीं… कनाडा, कंबोडिया और जापान के डाक टिकट पर भी श्रीराम

अयोध्या के राजा राम न केवल भारत बल्कि एशिया महाद्वीप के अलावा कई देशों में आस्था का केंद्र रहे हैं, इसलिए विदेश के डाक विभाग ने भगवान राम से जुड़े धार्मिक कथानक को डाक टिकट, पोस्टकार्ड और डाक आवरण में स्थान दिया है.

इंदौर जीपीओ में डाक टिकट संग्रहकर्ता 72 बरस के ओमप्रकाश केडिया के जुटाएं श्रीराम के दुर्लभ डाक टिकट, पोस्टकार्ड और डाक आवरण की प्रदर्शनी लगी है, जिसमें न केवल भारत बल्कि कनाडा, कंबोडिया, नेपाल, इंडोनेशिया, फिलीपींस, श्रीलंका और टोक्यो आदि देशों के डाक टिकट हैं.

केडिया द्वारा लगाई गई प्रदर्शनी में भगवान राम से जुड़ी आस्था के साथ विदेशों से संबंध को दिखाया गया है. शौक के कारण अस्तित्व में आए उनके संग्रह में करीब एक दर्जन देशों के सैकड़ों डाक टिकट हैं, जिनमें भगवान राम के अलग-अलग रूप हैं.

केडिया बताते हैं कि जहां से भी डाक टिकट अथवा पोस्टकार्ड के बारे में जानकारी मिलती, वह उसे एकत्र करने के लिए हर संभव कोशिश करते हैं. इनमें भगवान राम के डाक टिकट, पोस्टकार्ड और डाक आवरण है.

इनमें खासतौर पर भारत में पहला रामायण आधारित डाक टिकट, भगवान श्रीराम का दशावतार रूप, राम लक्ष्मण जटायु की पीड़ा और रावण द्वारा सीता हरण जैसे कई कथानक मौजूद हैं. इसके अलावा विभिन्न देशों में उनके यहां की संस्कृति और धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भगवान राम से जुड़े प्रसंग हैं.

विदेशों में भगवान राम की शैली और पहनावे पर भी डाक टिकट हैं. नेपाल में माता सीता से जुड़े कथानक के साथ भी राम मिलते हैं, तो श्रीलंका के डाक टिकट में रावण के साथ अलग रूप से राम को दर्शाया गया है. जो आज भी हूबहू उतने ही आकर्षक और दुर्लभ हैं.

प्रदर्शनी में आसियान-भारत मैत्री रजत जयंती शिखर सम्मेलन पर 2018 में जारी खास डाक टिकट और 1900 वीं सदी सहित तकरीबन 300 डाक टिकट, पोस्टकार्ड और डाक आवरण हैं, जो हैरान करते हैं.

यह संग्रह आज कई राम भक्तों के लिए आस्था और आकर्षण का विषय बना हुआ है. जिसे देखने के बाद लोग खासा संतोष और खुशी महसूस करते हैं. भक्त अपने राम की ख्याति देखकर खुश होते हैं.

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