Airport के लिए इन 14 गावों की जमीन का होगा अधिग्रहण, करोड़ों में बिकेगी किसानों की जमीन

राज्य सरकार ने कांगड़ा हवाई अड्डे के विस्तार के लिए भूमि अधिग्रहण को मंजूरी दे दी है। अब भूमि अधिग्रहण पर 2,000 करोड़ रुपये खर्च किये जायेंगे. एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया द्वारा डीपीआर तैयार किया जा रहा है।

विस्तार से कांगड़ा और शाहपुर के 14 गांवों के 1400 से अधिक परिवार प्रभावित होंगे। गगल एयरपोर्ट के विस्तारीकरण को लेकर सोशल इंपैक्ट असेसमेंट (एसआईए) ने प्रदेश सरकार को सर्वे रिपोर्ट सौंपी थी।

गग्गल हवाई अड्डे पर भूमि अधिग्रहण पर 2,000 करोड़ रुपये से अधिक की लागत आने का अनुमान है। एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया द्वारा डीपीआर तैयार किया जा रहा है। राज्य सरकार की अधिसूचना के बाद ही भूमि अधिग्रहण पर आगे की प्रक्रिया शुरू होगी. विनय धीमान, जिला पर्यटन अधिकारी, कांगड़ा

बैठक के दौरान एसआईए को गगल एयरपोर्ट विस्तार क्षेत्र के 14 गांवों का सर्वे करना था, लेकिन दो गांवों के लोगों ने सर्वे का बहिष्कार कर दिया। परिणामस्वरूप, टीम ने 12 गांवों में किए गए मूल्यांकन पर 230 पेज की रिपोर्ट राज्य सरकार को सौंपी।

अब कैबिनेट की बैठक में जमीन अधिग्रहण को मंजूरी दे दी गई है. इसके तहत भूमि अधिग्रहण पर अब 2,000 करोड़ रुपये से अधिक की लागत आने का अनुमान है. गग्गल हवाई अड्डे के विस्तार के लिए 3,010 मीटर का रनवे बनाया जाना है। पहले यह विस्तार दो चरणों में किया जाना था। लेकिन अब विस्तार का ये सारा काम एक साथ किया जाएगा

 

एयरपोर्ट को लेकर किसानों में विरोध्

गगल एयरपोर्ट विस्तारीकरण को लेकर दूसरे दिन मंगलवार को ग्राम पंचायत इच्छी के गांव इच्छी में एडीएम कांगड़ा हरीश गज्जू और एसडीएम कांगड़ा इशांत जस्वाल की अध्यक्षता में जनसुनवाई शुरू हुई। इस दौरान ग्रामीणों ने एक स्वर में कहा कि हवाई अड्डा विस्तार उन्हें किसी भी शर्त पर मंजूर नहीं है। एयरपोर्ट विस्तारीकरण के लिए एक इंच भूमि भी नहीं देंगे, चाहे जो हो जाए। मंगलवार को एयरपोर्ट विस्तारीकरण की जद में आने वाले इच्छी के ग्रामीणों की समस्याओं को सुना गया। खंड कांगड़ा के तहत आते पंचायत झिकली इच्छी टीका में हवाई अड्डा विस्तारीकरण काे लेकर प्रभावित लाेगाें की जनसुनवाई की गई। इस दौरान लोगों ने कहा कि उनकी अधिकतम भूमि उपजाऊ और कृषि याेग्य है।

यहां पर विभिन्न प्रकार की नकदी फसलें उगाई जाती हैं। यहां लाेग कृषि पर ही निर्भर हैं और इसी भूमि से उनकी आजीविका चलती है। यहां पर बहुत से लाेग अपना-अपना कामधंधा करते हैं और हवाई अड्डा विस्तार हाेने से उनके सारे साधन उनसे छिन जाएंगे। इसकाे लेकर जनसुनवाई में उपस्थित लाेगाें ने एक स्वर में कहा कि हम लाेग हवाई अड्डा विस्तार के लिए एक इंच भूमि सरकार काे नहीं देंगे, चाहे इसके लिए किसी भी हद तक क्याें न जाना पड़े। लाेग हवाई अड्डा के विस्तार का पुजोर विराेध करते हैं। लाेगाें ने कहा कि जनसुनवाई के नाम पर छला जा रहा है और लाेगाें की समस्याओं काे सुना ही नहीं जा रहा। सरकार लोगों पर अपने कानून थाेप रही है, जाे हम लाेगाें काे मंजूर नहीं है।

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